रविवार, 10 अप्रैल 2016

Hansata tha fir mujhe rula bhi deta tha

Hansata tha fir mujhe rula bhi deta tha,
Kar ke askar wade mujh se bhula bhi deta tha,
Bewafa tha magar achchha lagata tha dil ko,
Kabhi kabhi baaten muhabat ki suna bhi deta tha,
Tham leta tha haath mera kabhi yun hi khud,
Kabi haath apana mere haath se chhuda bhi leta tha,
Kabhi bewaqt chala aata tha milane ko,
Kabhi qeemati pal muhabat ke ganwa bhi deta tha,
Ajab dhoop chhaaon sa mizaaj tha us ka,
Mohabat bhi karta tha nazron se gira bhi deta tha!

हँसता था फिर रुला भी देता था,
कर के अकसर वादे मुझसे, भुला भी देता था;
बेवफा था मगर अच्छा लगता था दिल को,
कभी कभी बातें मुहब्बत की सुना भी देता था;
थाम लेता था मेरा हाथ कभी यूँ ही खुद;
कभी हाथ अपना मेरे हाथ से छुड़ा भी लेता था;
कभी बेवक्त चला आता था मिलने को;
अज़ब धूप छाओं का मिज़ाज था उसका,

मोहब्बत भी करता था, नज़रों से गिरा भी देता था!

गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

Most Touching Ghazal

Dhamak - QURATULAIN BALOCHAjab gham kiiii Dhamak, Dil par padi haiअजब गम की धमक, दिल पर पड़ी है

Ajab gham kiiii Dhamak, Dil par padi hai...
Udasyaaan aaino se..., Jhaankati hai....
Ye kis manzar men tumane ne sath chhoda...
Meri taswir aadhi rah gayi hai....

Tumhara haanth bhi to haanth par tha
Achaanak aankh meri khul gayi hai
Abhi kal tak falak tha dast_rashme
Or ab apni zamiin bhii ajnabi hai....

Tmhari yaad ghabara kar jahan se
Mere shaane se lag kar so gayi hai
Tere ham-khwaab hone ki tamanna
Meri be-khwabion me.. jaagati hai....

Fana ke baad bhi khwahish hai teri
Musaafat hai magar kitni kadi hai
Khaden hain saans ki sarhad pe tanha
Hamare darmiyan bas zindagi hai...

Ye kis manzar mai tum nai sath choraaa...
Meri taswir adhi reh gai hai...

Meri taswiiir adhi reh gai hai.
Listen on youtube/ watch Video:

मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

Ek Pyaar Ka Naghma Hai

Ek Pyaar Ka Naghma Hai, Mojo Ki Rawani Hai,
Zindagi Aur Kuch Bhi Nahi, Teri Meri Kahani Hai,

Kuch Pakar Khona Hai, Kuch Kho Kar Pana Hai,
Jeewan Ka Matlab To, Aana Aur Jana Hai,
Do Pal Ke Jeewan Se, Ek Umr Churani Hai,
Zindagi Aur Kuch Bhi Nahi, Teri Meri Kahani Hai,

Tu Dhar Hai Nadiya Ki, Main Tera Kinara Hu,
Tu Mera Sahara Hai, Main Tera Sahara Hu,
Aankho Mein Samandar Hai, Aashao Ka Pani Hai,
Zindagi Aur Kuch Bhi Nahi, Teri Meri Kahani Hai
Lyrics: Santosh Anand
एक प्यार का नगमा हैं, मौजो की रवानी हैं
जिन्दगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी हैं

कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना हैं
जीवन का मतलब तो, आना और जाना हैं
दो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी हैं

तू धार हैं नदिया की, मैं तेरा किनारा हूँ
तू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूँ
आँखों में समंदर है, आशाओं का पानी हैं

तूफ़ान तो आना है, आ कर चले जाना हैं
बादल हैं ये कुछ पल का, छा कर ढल जाना हैं
परछईयाँ रह जाती, रह जाती निशानी हैं
शायर: संतोष आनंद
*****This song is in movie “Shor” (1972) sung by Mukesh and Lata Mangeshkar.
Movie:                      Shor (1972)
Directed by              Manoj Kumar
Music by                  Laximikant Pyarelal
Singer                       Mukesh & Lata
Listen/watch on Youtube:
Jagjit Singh
 Movie video Song
Watch Full Movie Online

Bari Lambi Hain Raatain Hijr Ki

Bari Lambi Hain Raatain Hijr Ki Aur Roshni Kum Hai
Ghata Bhi Ghir K Aayi Hai Deeay Ki Lau Bhi Madhum Hai
Chita Roshan Hui Hai Wasl Ki Ye Kis Qareenay Se
K Main Ghabra Gya Hoon Iss Tarha Ro Ro K Jeenay Se
बड़ी लम्बी हैं रातें हिज्र की और रोशनी कम है,
घटा भी घिर के आई है, दिये की लौ भी मद्धम है;
चिता रोशन हुईं है वस्ल की ये किस किनारे से,
कि मैं घबरा गया हूँ, इस तरह रो-रो के जीने से|

शनिवार, 2 अप्रैल 2016

ज़रूरी था: राहत फ़तेह अली खान

लफ्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे
तूने जब आख़िरी खत मेरा जलाया होगा
तूने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा

तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था
मोहब्बत भी ज़रूरी थी
बिछड़ना भी ज़रूरी था
ज़रूरी था की हम दोनों
तवाफ़े आरज़ू करते
मगर फिर आरज़ूओं का
बिखरना भी ज़रूरी था
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था

बताओ याद है तुमको
वो जब दिल को चुराया था
चुराई चीज़ को तुमने
ख़ुदा का घर बनाया था
वो जब कहते थे
मेरा नाम तुम तस्बीह में पढ़ते हो
मोहब्बत की नमाज़ों को
कज़ा करने से डरते हो
मगर अब याद आता है
वो बातें थी महज़ बातें
कहीं बातों ही बातों में
मुकरना भी ज़रूरी था
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था

वही हैं सूरतें अपनी
वही मैं हूँ, वही तुम हो
मगर खोया हुआ हूँ मैं
मगर तुम भी कहीं गुम हो
मोहब्बत में दग़ा की थी
सो काफ़िर थे सो काफ़िर हैं
मिली हैं मंज़िलें फिर भी
मुसाफिर थे मुसाफिर हैं
तेरे दिल के निकाले हम
कहाँ भटके कहाँ पहुंचे
मगर भटके तो याद आया
भटकना भी ज़रूरी था
मोहब्बत भी ज़रूरी थी
बिछड़ना भी ज़रूरी था
ज़रूरी था की हम दोनों
तवाफ़े आरज़ू करते
मगर फिर आरज़ूओं का
बिखरना भी ज़रूरी था
तेरी आँखों के दरिया का

उतरना भी ज़रूरी था

Tanha tanha mat socha kar

Tanha tanha mat socha kar
mar jayega mat socha kar
pyar ghadi bhar ka hi bohat hai
sacha jhoota mat socha kar
jiski fitrat hi dasna ho
wo to dasega mat socha kar
dhuup mein tanha kar jaata hai
kyun ye saayah mat socha kar
apna aap ganvaakar tuune
paaya hai kya mat socha kar
maan mere ‘Shehzad’ vagarna
pachchtayega mat socha kar

Poet-Farhat Shehzad

शुक्रवार, 11 मार्च 2016

बरगद का यह इस्तेमाल बिस्तर पर मचा देगा धमाल

बरगद का यह इस्तेमाल बिस्तर पर मचा देगा धमाल
बरगद का पेड़ आपने देखा ही होगा। इसके फल भी देखे होंगे। क्या आप जानते हैं कि बरगद के ये फल आपके पौरुष शक्ति बढ़ाने में कितना मददगार है। इसके इस्तेमाल से शीघ्र पतन, स्वपनदोष, कमजोरी, प्रमेह, वीर्य का पतलापन और वीर्य के अन्य विकार दूर होते हैं। साथ ही यह काम शक्ति और स्पर्म बढ़ाने वाला होता है जिससे आप अपने विवाहित जीवन में भरपूर आनंद ले सकते हैं। यह इस्तेमाल बेहद सस्ता और चमत्कारिक परिणाम देने वाला है। यह इस्तेमाल स्पर्म की बीमारी और कमजोरी से ग्रस्त रोगियों के लिए अच्छे से अच्छे नुस्खों से कहीं अच्छा है।
फल के इस्तेमाल का तरीका
बरगद में काम शक्तिवर्धक और शुक्रवर्धक गुण पाए जाते हैं। बरगद के पेड़ में लाल लाल छोटे छोटे बेर के समान फल लगते हैं। बरगद के पेड़ के ये लाल लाल पके हुए फल हाथ से तोड़ें। जमीन पर गिरे हुए न लें। इनको जमीन पर कपड़ा बिछा कर छाया में सुखाएं। सूखने के बाद पत्थर पर पीसकर पाउडर बना लें। सुखाते समय पीसते समय लोहे का उपयोग नहीं होना चाहिए। लोहे से इन्हें नहीं छूना है। इस पाउडर के तोल के बराबर पीसी हुई मिश्री मिला लें। मिश्री भी पत्थर पर ही पीसें। भली प्रकार मिश्री और बरगद के फलों के पाउडर को मिलाकर मिट्टी के बर्तन में सुरक्षित रखें। इसकी आधी चम्मच सुबह शाम दो बार गर्म दूध से फंकी लें। इससे शीघ्र पतन समाप्त होकर काम शक्ति प्रबल हो जाती है। विवाहित जीवन का भरपूर आनंद आता है। शारीरिक स्वास्थय अच्छा होकर चेहरे पर लाली चमकने लगती है। इस सस्ते लेकिन मेहनत से भरपूर प्रयोग को करके देखें।
बच्चे पैदा करने वाले कीटाणु (स्पर्म) यदि वीर्य में ना हो तो इस प्रयोग से बच्चे पैदा करने वाले कीटाणु वीर्य में पैदा हो जाते हैं। आदमी बच्चे पैदा करने योग्य हो जाता है। शुक्राणुओं के न होने से जो पुरुष बच्चे पैदा करने के अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं, वो इस प्रयोग को ज़रूर करें, और ये प्रयोग करने के बाद अपना अनुभव ज़रूर बताएं, जिस से और लोगों को भी ये प्रयोग करने की प्रेरणा ले सकें।
अन्य इस्तेमाल
बरगद की कली, डंठल को तोड़कर इससे निकलने वाले दूध की पांच बूंदें एक बताशे पर टपका कर खा जाएं। इस प्रकार चार बताशे हर रोज खाएं। यह सूर्योदय से पहले खाएं। नित्य दूध की एक बूंद बढ़ाते जाएं। इस प्रकार दस दिन लेकर फिर एक बूंद रोज कम करते जाएं। इस प्रकार 20 दिन यह इस्तेमाल करने से वीर्य का पतलापन, प्रमेह, स्वपनदोष ठीक हो जा सकता है|