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सोमवार, 11 अप्रैल 2016

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे 
मैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे 

रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िन्दगी बनकर 
ये और बात मेरी ज़िन्दगी वफ़ा न करे 

ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में 
ख़ुदा किसी से किसी को मगर जुदा न करे 

सुना है उसको मोहब्बत दुआयें देती है 
जो दिल पे चोट तो खाये मगर गिला न करे 

ज़माना देख चुका है परख चुका है उसे 
  जान से जाये पर इल्तजा न करे 

मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

Bari Lambi Hain Raatain Hijr Ki

Bari Lambi Hain Raatain Hijr Ki Aur Roshni Kum Hai
Ghata Bhi Ghir K Aayi Hai Deeay Ki Lau Bhi Madhum Hai
Chita Roshan Hui Hai Wasl Ki Ye Kis Qareenay Se
K Main Ghabra Gya Hoon Iss Tarha Ro Ro K Jeenay Se
बड़ी लम्बी हैं रातें हिज्र की और रोशनी कम है,
घटा भी घिर के आई है, दिये की लौ भी मद्धम है;
चिता रोशन हुईं है वस्ल की ये किस किनारे से,
कि मैं घबरा गया हूँ, इस तरह रो-रो के जीने से|