Ghazal Sher
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रविवार, 17 अप्रैल 2016
तेरी ज़मीनों पे आसमां बन के आयेंगे;
तेरी ज़मीनों पे आसमां बन के आयेंगे;
तेरे ख़यालों में ध्यान बन के आयेंगे|
हम आदमी हैं, अपना लो आदमी की तरह;
ना अपनाया, तो भगवान बन के आयेंगे|
हम कॉलेज में आये थे रुसवाई लेकर;
अब जो लौटेंगे तो पहचान बन के जाएंगे|
सोमवार, 11 अप्रैल 2016
जिंदा रहने को कभी कुछ भी तो, नही चाहिए था,
जिंदा रहने को कभी कुछ भी तो, नही चाहिए था,,
वही कमी साबित हुई,जिस काबलियत पर गुमां था।
S S B Maurya
बुधवार, 6 जनवरी 2016
MANJIL KYA HAI
मंजिल क्या है, रास्ता क्या है;
हौसला है तो फासला क्या है..!
वो सदा देकर दूर जा बैठे..;
किससे पूछूं मेरी खता क्या है..!
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Manzil kay hai, rasta kya hai,
hausla hai to fasla kya hai,
vo saja dekar door jaa baithe,
kis se puchhun ki meri khata kya hai…
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